Wednesday, April 15, 2015

Buried the contructive works of Gandhiji in Madhubani Ashram (मधुबनी आश्रम),East Champaran,Bihar.





मधुबनी आश्रम के मंत्री निवास के सामने शराब की बोतले
मधुबनी आश्रम जो हमारे सुखद एवं खुशहाल भारत की तस्वीर थी और गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह आन्दोलन का सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक था लेकिन आज ये अपने जर्जर अस्तित्व पर रोने को मजबूर है.रोने के लिए मजबूर उसके लाभ उठाने वालों ने ही कर दिया है.खादी ग्रामोद्योग संघ को अपने रेशमी कपड़ो एवं अन्य उत्पादों को देने वाला संस्थान का अस्तित्व मिट गया लेकिन आज ये कथित गांधीवादी बर्बादी का जश्न मनाने के लिए खर्च करने के लिए तयारी कर रहे है लेकिन ये इसके जीर्णोद्धार हेतु चर्चा करना भी उचित नहीं समझते.ये कथित गांधीवादी जो घर से बाहर निकलते समय खादी कपडा और टोपी पहनना नहीं भूलते लेकिन गांधीजी के एक रचनातमक कार्य को कर सके, हो नहीं सकता.इनकी मानसिकता गांधीजी के नाम पर मीडिया में आना और अपनी वाह-वही लूटना होता है ,गांधीजी का करी नही करना खैर सबको हक़ है अपने हिंस्से के भारत माँ को लूटने का.     
   आज मैं और आप ही नहीं बल्कि पूरा विश्व गांधीजी के आदर्शो को अपना रहे है.जहाँ भारत के
प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिसन को हरी झंडी दिखाते है तो वही UNO उनके जन्मदिन को अहिंसा दिवस के रूप में मनाने हेतु घोषित करती है लेकिन ये कथित गांधीवादी लोग भारत के चंपारण में आदर्शो की चिता बनाकर आग लगाने की तैयारी में है.
मधुबनी आश्रम में व्याप्त गंदगी

ये है मधुबनी गाँधी आश्रम में भेका हुआ बियर/शराब की बोतले जो मंत्री-निवास के सामने अपनी कहानी कह रही है. खादी ग्रामोद्योग में मंत्री को गांधीजी के नाम पर वेतन मिलता है लेकिन ये उस वेतन का प्रयोग गाँधी के विचारो को दफ़न कर शराब व् नशा का सेवन कर रहे है. साफ-सफाई क्या होता है ? ये गांधीवादी एवं खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारी तो भूल ही गए है.
ये मैं सिर्फ नकारात्मक पहलु बता कर छोडना नहीं चाहता बल्कि इसके कारन एवं निराकरण हेतु समीक्षा भी करना चाहते है.इस दुर्दशा के पीछे आज की इन गांधीवादियों को देना चाहता हूँ तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.चंपारण सत्याग्रह आन्दोलन पार्ट 2 की आवश्यकता है जो आज अपनों से ही लड़ना है.

Champaran Satyagrah: Various aspect of this revolution for changing



चंपारण सत्याग्रह के विविन्न पहलु:
बिहार का चंपारण 1917 ई. में सत्याग्रह का पहला स्थल है.चंपारण का नाम आज गांधीजी के सत्याग्रह के परिप्रेक्ष्य में जाना जाता है लेकिन उससे पहले चंपारण को कोई नहीं जनता था.चंपारण में गांधीजी का आगमन चंपारण के लिए भी और गांधीजी के लिए भी एक मिल का पत्थर साबित हुआ . चंपारण सत्याग्रह जहां देश की आजादी के लिए एक रास्ता बनाया वही गांधीजी को अहिंसा रूपी हथियार मिला जो अंग्रेजो के लिए खतरनाक साबित हुआ.
आगमन की पृष्ठभूमि: चंपारण में भूमिपतियों द्वारा किसानों का निर्मम शोषण एवं नील के खेती हेतु बाध्य करना और इसके विरुद्ध जनाक्रोश ,एक सबसे बड़ा कारण है ,गांधीजी का चंपारण आगमन का. अंग्रेजो ने चम्पारण के एक लाख एकड़ से भी अधिक उपजाऊ भूमि पर कब्जा कर लिया था और उनपर अपनी कोठियां स्थापित कर ली थी। आज भी ये कोठियां अग्रेजों की अत्याचार का कहानी कह रही है. ये लोग खुरकी कोतवाली और तीनकठिया व्यवस्था के द्वारा किसानों पर तरह-तरह के जुल्म बरपाते और उनका शोषण करते थे। खुरकी व्यवस्था के तहत अंग्रेज रैयतों को कुछ रुपये देकर उनकी कुल जमीन, घर उत्यादि जरपेशगी रखकर उसपर उन्हीं से जीवन भर नील की खेती कराते थे। इसी प्रकार तीनकठिया व्यवस्था के तहत किसानों को अपने खेत के प्रत्येक बीघा के तीन कठ्ठे के उपर नील की खेती करनी पड़ती थी। इसमें खर्च रैयतों का होता था और बिना मुआवजा दिये नील अंग्रेज ले जाते थे। इतना ही नहीं अनेक तरह के टैक्स उनसे वसूला जाता था।
    ये एक तरह से दिल को दहला देने वाला दृश्य था जिसमे कुछ किसान नेताओं को आगे आने हेतु मजबूर किया. इन्ही किसानों में राजकुमार शुक्ल पर दुःख का पहाड़ टुटा था जिन्होंने गांधीजी को चंपारण बुलाने हेतु लखनऊ,कानपूर व् कोलकाता तक पीछा नहीं छोड़ा, अंततः शुक्ल ने गांधीजी को चंपारण आने हेतु राजी करवा लिए और कोलकाता से सीधे चंपारण के लिए रवाना हुए.
चंपारण आगमन एवं सत्याग्रह :- गांधीजी जी चंपारण में मुजफ्फरपुर से होते हुए 15 अप्रैल 1917 को पहुंचे और उसके बाद शुरू हुआ किसानों पर हुए अत्याचार का अवलोकन लेकिन आगमन के दुसरे दिन ही पुलिस सुपरीटेंडेंट का क़ानूनी नोटिस मिला ,चंपारण छोड़कर चले जाने की.लेकिन गांधीजी ने बड़े ही विनम्रता से क़ानूनी नोटिस को स्वीकार कर अपनी आगे की कार्य को चंपारण के मित्रोँ की सहयता से करते रहे.”सरकारी कानून के अनुसार मुझपर मुकदमा चलाया जानेवाला था.पर सच पूछा जाये तो मुकदमा सरकार के विरुद्ध था.कमिशनर ने मेरे विरुद्ध जो जाल बिछाया था ,उसमे उसने सरकार को ही फंसा दिया. ”-गांधीजी.

  गांधीजी ने निलहों के अत्याचार से निज़ात दिलाने के लिए किसानों से स्वं मिलते, पैदल ही विबिन्न इलाकों में जाकर खुली जांच करना सामिल है.मोतिहारी एवं बेतिया में हजारों किसानों का आना और अपना वक्तव्य लिखवाना  और किसानों के लिए गए बयानों के आधार पर सरकार को देने के लिए रिपोर्ट तैयार किया गया.गवर्नर को रिपोर्ट सौपने के बाद गांधीजी को सरकार द्वारा जाँच कमिटी में गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नामित करना , कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण सफलता थी.जाँच समिति की रिपोर्ट की सरकारी स्वीकृति एवं विधानसभा द्वारा चंपारण कृषि संबंद्ध अधिनियम पास करके रैयतो को राहत सम्बन्धी व्यव्स्था लागु किया गया.इस तरह से बिना किसी हिंसा के एक बहुत बड़े जंग को जीत लिया गया जो भारतीय इतिहास की एक कालजयी तारीख के रूप में शुमार है.
सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान विविन्न रचनात्मक कार्यक्रम:- सत्याग्रह आन्दोलन ने चंपारण को राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया. ऐसे तो गांधीजी चंपारण में किसानों की समस्या को लेकर आये थे और जब आकर देखा तो समस्या सिर्फ कृषि का ही नहीं बल्कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य का भी विकट था. आन्दोलन के दौरान कार्यकर्ताओं का एक दल तैयार हुआ जो आन्दोलन में अपने स्तर से सहभागिता निभा रहे थे.
·         गांधीजी ने उनके लिए व्यवहार, पहनावा,पोशाक, खान-पान,रहन-सहन आदि के सम्बन्ध में नियम निर्धारित करते थे और खुद पालन करते हुए करवाते थे.
·         जाट-पात का विरोध ,सह्भोजन एवं स्वालंबन हेतु कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना
·         चंपारण की जनता की मूल समस्या अंग्रेजो ,कोठीवालों और जमींदारों से दर था जिसके लिए किसानों का उनके सामने बयान लेकर निर्भीक बनाना.
·          बच्चों , नौजवानों को रोजगारपरक शिक्षा देने हेतु बुनियादी विद्यालय खोलना.पहला बुनियादी विद्यालय बरहरवा लखनसेन में खुला और उसके बाद मधुबन,तुरकौलिया,भितिहरवा में खुला.भितिहरवा में जहा गांधीजी स्वं संचालन कर रहे थे वही कस्तूरबा गाँधी बरहरवा में.
·          गांवों में खासकर विद्यालय वाले स्वं पडोसी गाँव में स्वच्छता हेतु जागृति पैदा करना,सहयोग से रास्ता बनाना, सफाई करना,खुले में शौच ण करने हेतु लोगों को जागरूक करना.
·         स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता हेतु मुंबई से चिकित्सकों के दल को गांवों में व्यव्स्था करवाना.
·         गांधी ने अपने चंपारण प्रवास के दौरान कुष्ठ रोगियों की बहुत सेवा की
·         स्‍वयंसेवकों ने मैला ढोने, धुलाई, झाडू-बुहारू तक का काम किया

महीनों अहिंसात्मक तरीके से संचालित सारे कार्यो का रिपोर्ट बनाकर सरकार को सूचित करते रहना और स्थानीय लोगों प्रशिक्षित करते रहना जिससे इन रचनात्मक कार्यों को आगे भी जारी रखा जा सके. गांधीजी ने अपनी आत्‍मकथा में लिखा है कि-‘ चम्‍पारण का यह दिन मेरी जिन्‍दगी में ऐसा था
जो कभी भुलाया नहीं जा सकता, जहां मैंने ईश्‍वर का, अहिंसा का और सत्‍य का साक्षात्‍कार किया।’
समीक्षा:- चंपारण सत्याग्रह के पुरे घटनाक्रम को देखने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि गांधीजी ने जो क्रियाबिधि अपनाई और जनता ने जो सहयोग किया वह राष्ट्रिय आन्दोलन की अमूल्य निधि है. चंपारण सत्याग्रह के आधार पर भारत की विविन्न समस्यायों को सुलझाया जा सकता है.इसलिए चंपारण सत्याग्रह का भारतीय स्वतंत्रता संग्रह के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है.एक लघु स्तर पर सफल आन्दोलन को जब राष्ट्रिय स्तर पर कई सालों तक अनुकृति की गयी जिसके परिणाम स्वरूप भारत स्वतंत्र हुआ और भारत की नवनिर्माण की प्रक्रिया शुरु हुयी.

Sunday, March 29, 2015

चंपारण की “मोतीझील का अस्तित्व” और हम

चंपारण को आन्दोलन के कारण ज्यादा जाना जाता है.गांधीजी के आने से पहले चंपारण को कोई नहीं जानता था क्योकि यह क्षेत्र नेपाल के बॉर्डर से सटे  साधनविहीन, अशिक्षित व् पिछडा,अंग्रेजो द्वारा शोषित था.गाँधी जी के चंपारण में आगमन से लोगों में एक अलग तरह का उर्जा का संचार हुआ, लोग अपने अधिकारों के लिए जगे जो प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन में चंपारण का एक अहम् भूमिका रही.आज गांधीजी के आगमन के 100 वर्ष पुडने वाले है लेकिन आज गाँधी टोपी एवं गाँधी नाम की महता ही सिर्फ लोगों के बीच में माएने रखता है.गांधीजी ने अकेले पुरे विश्व को अपने कर्म से हिला कर रख दिया था लेकिन आज गांधीवादियों की फ़ौज भी एक छोटी-सी समस्या को नहीं निबटा पाते है.चंपारण इसका जीता-जागता उदाहरण है.आज चंपारण में प्रतिभाओ की कमी नहीं लेकिन एक तरफ धरातल पे समस्यायें सुरसा की तरह मुंह बाये खड़ी है. समस्यायों की इस विशाल कड़ी में मोतिहारी शहर के बीचों-बीच स्थित “मोतीझील की अस्तित्व” अपने जीर्णोद्धार हेतु बाँट जोह रही है.नेताओं व् -जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार जीर्णोधार की उद्घोषणा कर और अमल नहीं कर जले पर नमक छिरकने का कम किया है.आखिर कब तक सहेगी चंपारण की जनता. आग जलना ही था और हुआ भी वही.आन्दोलन का एक माहौल बना जो फेसबुक के एक पोस्ट से जो अंसारुल हक़ ने अपने मोतीझील के दर्द को शेयर किया.अपने खुबशुरुत शब्दों से अपने फेसबुक दोस्तों के बीच चर्चा शुरू हुआ और “मोतीझील की अस्तित्व” हेतु लोग पहली बार ऑनलाइन से ऑफलाइन हांथ में मोमबती लेकर सडको पर उतरे.सडक पे क्या उतरे कि सबके दिल में एक जगह बना ली और शुरू हुआ आन्दोलन का दौर. देखते देखते “मोतीझील बचाओं अभियान समिति” का गठन हो गया और टी-शर्ट ,टोपियों ,वेबसाइट एवं फेसबुक अपडेट के साथ एक अभियान शुरू हो गया. शहर के बुद्धिजीवियों के साथ आज के नौजवानों ने कंधे से कंधे मिलकर चलने लगे और सरकार एवं प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए विबिन्न कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ.शहर के समाजसेवीयों,शिक्षको, छात्रो एवं बुद्धिजीवियों के साथ अनेक बार बैठक,मोमबती के साथ रैली, मसाल जुलुस, बाइक रैली, सेमिनार एवं श्रमदान के अलावे लगातार SMS ,ईमेल एवं फ़ोन द्वारा लोगों के बीच जागृति के साथ जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह से मुलाकात सामिल है. वही नगर परिषद्,मोतिहारी द्वारा भी पहली बार “मोतीझील महोत्सव” का आयोजन कर मोतीझील सँवारने का सकारात्मक पहल किया लेकिन अभी तक परिणाम निरर्थक रहा है.
     अपने अस्तित्व की बाँट जोह रही मोतीझील आंशु बहाने के अलावा क्या कर सकती है?मोतिहारी शहर के बीचों-बीच अवस्थित जहाँ से हजारों लोग रोजाना आते-जाते है जिसमे प्रशासनिक पदाधिकारी से लेकर राजनेता तक सामिल है लेकिन मोतीझील के आंशुयों पर किसी की भी नज़र नहीं जाती. धन्य है मोतीझील कि शहर के कुछ युवा एकजुट होकर इसके अस्तित्व हेतु आन्दोलन छेड़ चुके है. चाहे उनको आन्दोलन की जानकारी नहीं है लेकिन काम करना है ये जूनून सवार है और मोतीझील के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है. ये युवाओं की टोली ने शहर के सभी वर्गों एवं संस्थाओं को एक सूत्र में बांधकर मोतीझील के विकाश हेतु प्रयाश कर रहे है. इनका एक ही नारा है “सबका साथ,मोतीझील का विकाश”.अगर मोतीझील का विकाश होता है और अपने नवीनतम स्वरुप में बदलती है तो अंसारुल हक़ एवं इनके टीम सदस्यों को एक अहम् भूमिका को भूलना नहीं होगा.”मोतीझील बचाओं अभियान समिति” के अध्यक्ष अंसारुल हक़ है तो वही नौजवान व् उर्जावान महासचिव
अनिल कुमार वर्मा है.उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी शमशाद अली खां निभा रहे है तो वही कोषाध्यक्ष रजनीश कुमार एवं मकबूल आलम पुरे सिद्दत के साथ आगे बढ़ा रहे है.संरक्षक मंडल में डॉ.संजीव कुमार,डॉ.चंद्रसुभाष,डॉ.पीकेवर्मा,पत्रकार रफ़ी अहमद,डॉ.विवेक सामिल है तो वही प्रत्येक कार्यक्रम को सफलता तक पहुँचाने में सक्रिय सदस्य के रूप में विकास राज,अंकित दुबे,रंजित गिरी,दिवाकर सिंह,दीपक कुमार,आसुतोष कुमार,संतोष कुमार रौशन,भूषण कुमार,विवेक गौरव आदि सामिल है. इस अनुभव टीम ने वो अनुभव वाली कम कर डी जिसमे शहर के लगभग सामाजिक संगठन आगे आकार अपनी सहयोग दे रही है जिसमे सामिल है रोटरी क्लब मोतिहारी, लेक टाउन मोतिहारी,ख्वाब फाउंडेशन,चंपारण छात्र संघ,खेल संघ,युवा संगठन,विविन्न स्वास्थ्य संगठन,बलुआ व्यावसायिक संघ,प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन,जिला विविध संघ,सिख यूथ फेडरेशन,नीमा ,लायंस क्लब.


    अन्त में, गांधीजी की कर्मभूमि पर अगर उनके 100 वर्ष बीतने के बाद भी मोतीझील का जीर्णोधार हो जाता है तो यह एक बहुत बड़ी उपहार होगा.जब गाँधी जी अकेले चंपारण से सत्याग्रह की शुरुआत कर विदेशीयों को भगा सकते है तो क्या इतनी संस्था मिलकर मोतीझील का जीर्णोधार नहीं करा सकते है?     

Wednesday, October 8, 2014

A strategy is required for making an Ideal and Digital Panchayat to SIRHA

सिरहा पंचायत को एक मॉडल पंचायत के रूप में बदलना है और एक प्रोजेक्ट के तौर पर कार्य करना एक जरदस्त चुनौती है. 2015 तक गाँव को पूरी तरह से हाई-टेक बना देना और पूरा डॉक्यूमेंट तैयार करना, गाँव में किये जा रहे कार्य के दौरान जो समस्याये आ रही है, उससे लिखकर एक मेकनिज्म तैयार करना जिससे दूसरे गाँव में आसानी से लागू किया जा सके. 2015 तक सिरहा गाँव को और पुरे चंपारण को 2017 तक विकसित कर गांधीजी के 2017 में चंपारण आने का 100 वर्ष पूरा होने पर एक शानदार उपलब्धि होगी.इसके लिए “सिरहा गाँव” एक दिशा-निर्देश का कार्य करेगा.गाँव को जनवरी 2009 से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन अभी तक वह तस्वीर नहीं आ पाया है. अत: यह बहुत जरुरी बन जाता है कि पुरे उर्जा व उचित दिशा-निर्देश में बहुत सारी संस्थाओं का योगदान हो. सर्वे में शिक्षा, स्वास्थ्य व् सरकारी योजनाओं पर कार्य कर समस्या व् समाधान खोजने का प्रयास किया गया, गाँव के दो मध्य विद्यालयों व् दलित बस्ती का मुयाना किया गया और समस्यों को चुनकर उसका हल निकालने का प्रयास किया गया.
सर्वे के दौरान निम्लिखित समस्याओं पर विचार किया गया....   
1.सरकारी योजनाओं का सही आंकड़ा का नहीं होना
2.गाँव के लोगो की उदासीन मानसिकता
3.पुस्तकालय में पुस्तकों का अभाव व् विद्यार्थियों में जागरूकता की कमी
4.कंप्यूटर रहने के वावजूद बिजली के अभाव में संचालन बंद
5.युवाओं की उदासीनता व् दिशा भटकाव
6.स्वास्थ्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति एवं लोगों की उदासीनता
7.लोगो के बीच सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी
8.सरकारी स्कूलों में प्रबंधन की कमी
9.योग्य शिक्षक की कमी अथवा उचित प्रशिक्षण का अभाव
10.स्कूलों में सरकारी योजनाओ का दुरुपयोग
11.स्कूल सहायता राशी का सही इस्तेमाल नहीं
12.बच्चों के बीच अनुशासन व् जानकारी का घोर अभाव
13.एक हाई स्कूल की आवश्यकता (लड़कियों के शिक्षा हेतु)
14.दलित बस्ती में शिक्षा,स्वास्थ्य व् मानसिकता में कमी
15.सबसे ज्यादा मेहनत की जरुरत है दलित बस्ती में

जरुरत है इसके हल के साथ धरातल पर उतारना ,रणनीति बनाकर पंचायत का मॉडल तैयार करना  

Sunday, September 28, 2014

शहीदे-आज़म वीर भगत सिंह के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

वंदेमातरम्,



   प्रथम राष्ट्रीय आन्दोलन द्वारा हमारे देश को आज़ादी मिली और देश के आज़ादी को एक शतक पुड़ने वाले है लेकिन आज भी हम पूरी तरह से न शिक्षित है और न ही संपन्न, न स्वनिर्भर है और न ही शांतिपूर्वक. आज समाज को बनाने वालें कम,समाज को बेचने वाले ज्यादा पैदा हो गए है . समाज को विनष्ट करने वालोँ में तो एकता है लेकिन समाज को बनाने वालोँ में इस भावना का अभाव है. विध्वंसक शक्तियों को एक-दुसरे पर विश्वास है लेकिन रचनात्मक शक्तिया हमेशा शक व् डर की भावनाओं से ग्रसित है.आज हम अपने ही मानसिकताओं का गुलाम हो गए है.
जरा सोचें,क्या हमारें वीर स्वतंत्रता सेनानियों की त्याग व् बलिदान के यही परिणाम है?क्या कभी उनलोगों ने सोचा होगा कि जिस धरती माँ के लिए हम अपनी बलिदान दे रहे है उसके लिए लोग आपस में ही लड़ेंगे?
 अगर समस्याओं और देश की कमियों की लिस्ट तैयार करने बैठ गए तो हमें रोने के अलावे और कुछ नहीं कर सकते . इससे बेहतर है कि की हम कुछ सकारात्मक कदम बढाकर समाज के उन विध्वंसक शक्तियों के प्रभाव को कम करे और हम सब एक होकर स्वं, परिवार, समाज व् देश की दशा- दिशा को उचित निर्णयों द्वारा मजबूत करने का एक बार फिर सामूहिक प्रयास करे. आज पुनः देश को जरुरत है भगत सिंह जैसे नौजवानों की जो जान की परवाह न करते हुए समाज हित में खड़े हो. आज जरुरत है गाँधी जैसे स्वप्नद्रष्टा देशभक्तो की ,जो अपनें स्वार्थों को त्याग करते हुए समाज को एक सकारात्मक दिशा दे. आज आवश्यकता है सुभाष, चंद्रशेखर,पटेल ,राजेंद्र प्रसाद. लक्ष्मीबाई जैसे अनेकों देशभक्तों की.आज आवश्यकता है एक द्वीतीय आन्दोलन की जिसमे हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों की ही सपनोँ को पूरा कर दे तो बहुत बड़ी श्रध्दान्जली होगी. उनके सपनों को पूरा करना ही अपने सपनों को साकार करना है.
   आज शहीदे-आज़म वीर भगत सिंह की जन्मदिवस पर हम कम-से-कम स्वं के साथ सिरहा पंचायत को एक आदर्श मॉडल पंचायत के रूप में बदलने का संकल्प ले और 2017 तक पुरे चम्पारण को विकसित कर हम अपनी श्रधांजलि अपने देशभक्तों को दे. आज युवाओं के आदर्श व् रोल मॉडल डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सिरहा पंचायत में आने के लिए अपनी सहमती दे चुके है और गाँव के सकारात्मक परिवर्तन को खुद देखना चाहते है.ये हमारे लिए गर्व की बात है कि हम एक ऐसे देशभक्त व् महान हस्ती के स्वागत की तैयारी में अपनी योगदान देने जा रहे है जिसके व्यक्तित्व की परिकल्पना मात्र से खून में एक अलग तरह की उर्जा का संचार होने लगता है.अंत में ,हम आपसे सहयोग एवं सहभागिता की आशा करते हुए वीर भगत सिंह के जन्मदिवस को ऐतिहासिक बनाने हेतु आपका हार्दिक स्वागत एवं धन्यवाद करते है.

जय हिन्द !        

Monday, December 30, 2013

A great moment with Dr. Kalam Sir in Rajbhwan, Patna

It was a great achievement for my life when I met Dr. Kalam sir in Rajbhawan, Patna.I would like to share my feeling with you of that great moments. On 29 th Sep 2013, Dr. kalam Sir had came for convocation in NIT, Patna. During this precious time, I had got appointment with Dr. Kalam in Rajbhwan to show my project “A Natural Operating System”. When I confirmed that I can visit Dr. Kalam in Patna at 4 o’clock, I got more positive and energetic towards achieving the goal of vision2020. Really It was a great feeling to know that I was going to show my project and handshake with Dr. kalam. I have done a lot towards achieving the goal of vision2020 only after reading the Dr. kalam’s book. But Now I had visited and handshake with him and blessed. Now I have got a lot of energy to do for our country. Nothing can stop me for doing such works. It was very interesting that everyone had known to me that Pro. Munna Kumar had appointment with Dr. Kalam sir. I was really become very glad to know this fact. Everyone had given me very respect. Before meeting with Dr. Kalam I had got a lot of achieving outside of Rajbhawan. Really It was amazing for me. After security check, I entered in the Rajbhawan. I was really so excited to imagine the moment when I met Dr. Kalam. I entered in Rajbhawan at 4 o’clock and wait about 2 hrs with some farmers and one more visitor. After 1 hr sitting with farmers and share some facts. I was said by security person, I should have to go in waiting room. Then wait there almost 1 hr more. There are some securities persons are sitting there. They asked me the purpose to visit Dr. Kalam. I told him about myself and my purpose. They appraised me for my noble cause and whatever I am doing in Champaran for achieving the goal of vision2020. Now the time had come to visit Dr. Kalam, I was informed by a man and he took me in lift and gone on 3 rd floor of Rajbhawan. I entered in the room where Dr. Kalam sir was staying. After entering in the room, he asked me in Hindi “How r u? Munna”. I surprised that a great person had talked me in Hindi. First of all I saluted him with “Jai Hind” and then said “I am fantastic”in hindi. He spread his hand for handshake and automatically my hand spread towards Dr. kalam’s hand. That moment was really a great moment for my life. After handshake, I obliged that my dreams come true now. After then he indicated me that sit down on and asked, tell me something. First of all, I had given him an Invitation letter for visiting champaran. He started to read the invitation and asked about geographical area and population about Champaran. I told all about champaran why champaran was so famous in the world. He promised me that I will surely visit the Champaran in next tour of Bihar. Now I had opened my project to show him. First of all, I told him about myself and my article published in Ezine“PreSense” of Ignited mind section (by Prime Point Foundation).He congratulated me and said “very good”. After then I show my project “A Natural Operating System”.About 15 minute had spend a great moments with great scientist of the world . He asked many questions related to this project. Many photographs had been captured in my own camera. That was really a historical and memorable day for my whole life. Icann’t explain my feeling in my word. So excuse me please, just try to meet that person , you can feel whatever I had felt at that time. It was the first chapter of my life to visit Dr. kalam sir .After then My life has been changed automatically and start 2nd chapter of my life in which I am going to contribute a lot for achieving the goal of vision2020.It would be a land mark It means that going to implement my project “A Natural Operating System” at root level for achieving the goal of PURA mission. I would like to thanks K. Srinivasan sir, Ponraj Sir and Dhanshyam Sharma sir for arranging this grand meeting with Dr. Kalam. I would like to thanks Mr. Sola Kumar and mr. Nakul kumar for giving a great company for this mission. Jai Hind Thank you