अपने अस्तित्व की बाँट जोह रही मोतीझील आंशु बहाने के अलावा क्या कर सकती
है?मोतिहारी शहर के बीचों-बीच अवस्थित जहाँ से हजारों लोग रोजाना आते-जाते है
जिसमे प्रशासनिक पदाधिकारी से लेकर राजनेता तक सामिल है लेकिन मोतीझील के आंशुयों
पर किसी की भी नज़र नहीं जाती. धन्य है मोतीझील कि शहर के कुछ युवा एकजुट होकर इसके
अस्तित्व हेतु आन्दोलन छेड़ चुके है. चाहे उनको आन्दोलन की जानकारी नहीं है लेकिन
काम करना है ये जूनून सवार है और मोतीझील के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है. ये
युवाओं की टोली ने शहर के सभी वर्गों एवं संस्थाओं को एक सूत्र में बांधकर मोतीझील
के विकाश हेतु प्रयाश कर रहे है. इनका एक ही नारा है “सबका साथ,मोतीझील का
विकाश”.अगर मोतीझील का विकाश होता है और अपने नवीनतम स्वरुप में बदलती है तो
अंसारुल हक़ एवं इनके टीम सदस्यों को एक अहम् भूमिका को भूलना नहीं होगा.”मोतीझील
बचाओं अभियान समिति” के अध्यक्ष अंसारुल हक़ है तो वही नौजवान व् उर्जावान महासचिव
अनिल
कुमार वर्मा है.उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी शमशाद अली खां निभा रहे है तो वही
कोषाध्यक्ष रजनीश कुमार एवं मकबूल आलम पुरे सिद्दत के साथ आगे बढ़ा रहे है.संरक्षक
मंडल में डॉ.संजीव कुमार,डॉ.चंद्रसुभाष,डॉ.पीकेवर्मा,पत्रकार रफ़ी अहमद,डॉ.विवेक
सामिल है तो वही प्रत्येक कार्यक्रम को सफलता तक पहुँचाने में सक्रिय सदस्य के रूप
में विकास राज,अंकित दुबे,रंजित गिरी,दिवाकर सिंह,दीपक कुमार,आसुतोष कुमार,संतोष
कुमार रौशन,भूषण कुमार,विवेक गौरव आदि सामिल है. इस अनुभव टीम ने वो अनुभव वाली कम
कर डी जिसमे शहर के लगभग सामाजिक संगठन आगे आकार अपनी सहयोग दे रही है जिसमे सामिल
है रोटरी क्लब मोतिहारी, लेक टाउन मोतिहारी,ख्वाब फाउंडेशन,चंपारण छात्र संघ,खेल
संघ,युवा संगठन,विविन्न स्वास्थ्य संगठन,बलुआ व्यावसायिक संघ,प्राइवेट स्कूल
एसोसिएशन,जिला विविध संघ,सिख यूथ फेडरेशन,नीमा ,लायंस क्लब.
अन्त में, गांधीजी की कर्मभूमि पर अगर उनके 100 वर्ष बीतने के बाद भी
मोतीझील का जीर्णोधार हो जाता है तो यह एक बहुत बड़ी उपहार होगा.जब गाँधी जी अकेले
चंपारण से सत्याग्रह की शुरुआत कर विदेशीयों को भगा सकते है तो क्या इतनी संस्था
मिलकर मोतीझील का जीर्णोधार नहीं करा सकते है?








